Bhatapara : 42 वर्षों पुरानी जिले की मांग पर अब कांग्रेसी नेता कन्नी काटते नजर आ रहे हैं


Bhatapara भाटापारा– छत्तीसगढ़ सरकार के साढ़े चार साल पूरे हो गए अब चुनाव को कुछ ही महीने शेष रह गए हैं जैसे-जैसे चुनाव निकट आता जा रहा है वैसे वैसे जिले का मुद्दा और गर्माता जा रहा है 42 वर्षों पुरानी जिले की मांग पर अब कांग्रेसी नेता कन्नी काटते नजर आ रहे हैं। विदित हो कि साढ़े चार साल पहले विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर लोकोत्सव मैदान में हजारों की भीड़ के बीच तात्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कांग्रेस की सरकार आने पर भाटापारा को स्वतंत्र जिला बनाने का वादा किया था परंतु अब तक वे अपने वादे पर खरा नहीं उतर पाये हैं। जिले के मुद्दे पर आम जनता को जवाब देना अब कांग्रेसियों को भारी पड़ रहा है।

Bhatapara पिछली रमन सिंह की सरकार के विरोध में जिले की माँग को लेकर 15 महीने धरने पर बैठने वाले कांग्रेसी अब मुँह छुपाते फिर रहे हैं। धरने पर लगातार 15 महीने भाजपा सरकार के खिलाफ आग उगलने वाले कांग्रेसी अब कहाँ गए जनता यह सवाल कर रही है कि सरकार आने पर पृथक जिला बनाने की बात करने वाले काग्रेसी अब कब अपनी सरकार से जिला की घोषणा करवायेगें

Bhatapara प्रदेश के मुखिया के साथ कांग्रेसी भी प्रचार कर रहे हैं कि कांग्रेस ने जो कहा वो किया परन्तु पृथक भाटापारा जिले के मामले पर उनकी यह बात आम जनता हजम नहीं कर पा रही है। जिले के नाम आम जनता स्वयं को ठगा महसूस कर रही है। भाटापारा को जिला बनाने का सपना दिखाने वाले कांग्रेसी अब कहाँ हैं ?

Bhatapara स्वयं को भाटापारा का दिग्गज नेता और आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट का प्रबल दावेदार साबित करने वाले कांग्रेसी जिले के नाम पर मौन साधकर बैठ गए है, जाहिर है चुनाव को मात्र 6 माह ही बचे हैं ऐसे में कांग्रेसियों को केवल अपनी टिकट की चिंता पड़ी है उन्हें जनता की माँग से कोई सरोकार नहीं है। जिले का सवाल आते ही सारे नेता खुद को किनारा कर लेते हैं।

भाटापारा की आम जनता की नजरें अब भेंट मुलाक़ात पर टिकी हुई है, इसी महीने उनका दौरा लगभग तय है । अब आम जनता की उम्मीदें एक बार फिर से जाग गयी है कि शहीद नंद कुमार पटेल का सपना पूरा करते हुए प्रदेश के मुखिया भेंट मुलाकात मे भाटापारा को जिला जरूर बनाएंगे। क्या मुख्यमंत्री क्षेत्र की जनता के विश्वास पर खरा उतर पाएंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन यहां की जनता चाहती है कि वे अपने वादे के अनुरूप भाटापारा को स्वतंत्र जिला घोषित करे।

आगामी विधानसभा चुनाव मेँ कांग्रेस का रास्ता काँटो भरा होगा इसमे दो मत नहीं है। पहले ही लगातार दो चुनाव हार चुकी काँग्रेस तीसरी बार भी बैकफ़ुट पर नजर आ रही है। जिले की माँग कांग्रेस के गले की हड्डी बन चुकी है ऐसे में यह सीट जीतना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी। यदि यह सीट काँग्रेस को चाहिए तो भाटापारा को जिला बनाना ही होगा वरना यह सीट निकालना मुश्किल हो सकता है क्योंकि जिले के नाम पर आम जनता खार खाये बैठी है।